Advertisement

भाई! मुझे बना दो गधा। Special Focus On Animal's Cruelty In Agra.

भाई! मुझे बना दो गधा। Special Focus On Animal's Cruelty In Agra. गाय भैंस नहीं यह गधी है। बच्चा पैदा होने के साथ ही हम इससे काम लेना शुरू कर देते हैं। ऐसा कहना था रामचरण का आगरा के खेरागढ़ में।
मैंने कहा यदि आप की पत्नी, बहू-बेटी को 3 दिन पहले बच्चा पैदा होता तो क्या आप उनसे काम कराते?
रामचरण ने हमें घूर कर देखा शायद उनका उत्तर यही होता है कि आदमी और जानवर एक बराबर कैसे हो सकते हैं?
समझाने का असर नहीं हुआ तो हमने पुलिस बुलाने की धमकी भी दिया।
उसी समय एक सज्जन और आ गए जिन्होंने हमारा समर्थन किया और गधी के पीठ से ईट ढुलने वाली गद्दी उतर गई।
शायद गधी भी ध्यान लगाकर हमारी बात सुन रही थी इसीलिए बच्चे के समीप आने पर भी उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया।
मुंशी प्रेमचंद ने चर्चित कहानी दो बैलों की कथा में गधों को सबसे शांत प्रजाति का सहनशील जानवर बताया है।
लोग गधों को छूना नहीं चाहते इसके मूल में शायद यही होगा कि इन्हें धोबी समाज के लोग पालते हैं और इनके पीठ पर लोगों का गंदा कपड़ा लेकर धुलाई के लिए जाते हैं और फिर साफ कपड़े पीठ पर रखकर ही वापस लाते हैं।
किसी विद्वान ने गधे के बच्चे को सबसे सुंदर बच्चे के रूप में बताया है।
सुंदर तो है ही।
सच में बड़ा अच्छा लगा।
परमात्मा एक शुभ कार्य का अवसर प्रतिदिन सभी को देता है।
आइए संकल्प करते हैं कि हम उसे किसी भी कीमत पर नहीं गवायेंगे।

#agra#ghazipur#varanasi#brajbhushanmarkandey#delhi#mathura,

Post a Comment

0 Comments